राजीव गांधी और पाली
21 मई 2010
दिल में समाई हैं राजीव की वो यादें
राजेश दीक्षित
पाली। राजीव गांधी को इस दुनिया से अलविदा हुए आज भले ही 19 वर्ष हो गए हैं लेकिन अब भी पाली के कुछ शख्स ऐसे हैं जिनके दिल में उनकी यादें, उनके साथ बिताए संस्मरण और उनकी छवि बसी हुई हैं। जब भी गांधी की जयंती या पुण्यतिथि आती हैं तो वे उन पलों को याद करना नहीं भूलते। उनकी आंखों ने उस शख्स को नजदीक से देखा है। नई पीढ़ी के बहुत ही कम लोगों को यह याद भी नहीं होगा कि प्रधानमंत्री पद पर रहे राजीव ने पाली की धरा पर तीन बार कदम रखा। यहां के लोगों से मिले-जुले। मारवाड़ी व्यंजनों का लुत्फ लिया। जिस अम्बेडकर सर्किल से दिन में कई बार गुजरते हैं उस अम्बेडकर की प्रतिमा का अनावरण करने के लिए राजीव पाली आए थे। ' राजस्थान पत्रिका' ने राजीव की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके साथ कुछ पल बिताए उन लोगों से उनकी यादों को ताजा किया।
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पाली और राजीव गांधी
- 28 अक्टूबर-1983: जब राजीव गांधी राष्ट्रीय महामंत्री बने, उस समय उन्होंने पूरे राजस्थान का दौरा किया। दौरे के दौरान उदयपुर से होते हुए वे पाली जिले में प्रवेश किया। रणकपुर में कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और उनके साथ भोजन भी किया। भोजन में कैर, सांगरी, बाजरी का सोगरा, लस्सी कढी (खाटा) खिलाया था। यहां से वे सादड़ी गए, वहां आम सभा रखी गई। इसके बाद पाली आए, यहां बांगड़ स्कूल मैदान में सभा को सम्बोधित किया। यहां से कांग्रेस भवन होते हुए अम्बेडकर प्रतिमा का अनावरण किया।
-1988-में दूसरी बार सूखा बनाम सेवादल के दौरान राजीव गांधी चाणोद आए थे। यहां उन्होंने तालाब का निरीक्षण किया। सूखा प्रभावित क्षेत्रों को देखा। इस दौरान क्षेत्रीय विधायक बीना काक व राजस्थान प्रदेश कमेटी के अध्यक्ष अशोक गहलोत साथ थे।
- तीसरी बार 1989 के लोकसभा चुनाव में राजीव का चुनाव प्रचार के लिए पाली आना हुआ। इस समय कांग्रेस ने लक्ष्मीमल सिंघवी को टिकट दिया। वे बांगड़ स्टेडियम में आए और चुनावी सभा को सम्बोधित किया। यहां भी उन्होंने कहा था कि उपर से एक रुपए आते हैं तो नीचे आते-आते दस पैसे रह जाते हैं। इस दौरान वे स्वतंत्रता सेनानाी खुमाराम ओड के घर गए। वहां उन्होंने चाय-नाश्ता किया व परिवार के सदस्यों से मिले।
...और कार्यकर्ता आ गए गाड़ी के आगे
- 1983 में अम्बेडकर प्रतिमा के अनावरण समारोह में जब राजीव पाली आए थे, उस समय बांगड़ स्कूल में सभा रखी गई थी। यहां उनको कार्यकर्ताओं ने सिक्कों से तोला था। कार्यक्रम के बाद जब वे प्रतिमा अनावरण के लिए जाने लगे तब यूथ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ता उन्हें कांग्रेस भवन ले जाना चाहते थे, ताकि जर्जर पड़े कांग्रेस भवन में कुछ सुधार हो सके। बाद में कलक्ट्री चौराहे के पास यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता जमीन पर लेट गए। राजीव गांधी ने पुलिस अधिकारियों से पूछा क्या मामला है। जब उन्हें जानकारी दी तो वे कांग्रेस भवन जाने को तैयार हो गए। यहां उन्हें भवन की जर्जर स्थिति के बारे में बताया और सुधार के लिए कहा। स्वतंत्रता सेनानी धनराज वर्मा जो उस समय कांग्रेस के जिला महामंत्री थे उन्होंने राजीव को रोते हुए बताया कि कांग्रेस भवन मंदिर की स्थिति बेकार है।
अजमेर से लाए थे काले गुलाब
नगर परिषद में कार्यरत रविन्द शर्मा बताते हैं कि राजीव को काले गुलाब पसंद थे। मूर्ति अनावरण समारोह परिषद ने कराया था। काले गुलाब की कलियां लाने के लिए मुझो अजमेर नगर परिषद भेजा था। वहां से काले गुलाब की कलियां लेकर पाली आया।
मूर्ति का अनावरण
डॉ. भीमराव अम्बेडकर प्रतिमा का अनावरण राजीव गांधी (संसद सदस्य) ने 28 अक्टूबर 1983 को किया। इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर ने अध्यक्षता की।
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संस्मरण..........................................
पापा को मामा कहकर बुलाते थे
- राजीवजी मेरे पापा स्वतंत्रता सेनानी खुमाराम ओड को मामाजी कहकर बुलाते थे। इंदिरा गांधी ने साबरमती आश्रम में पापा को राखी बांधी थी। तब से वे इंदिराजी को धर्मबहन मानने लगे। सूखा बनाम सेवादल एवं प्रधानमंत्री फॉलोअप कार्यक्रम हुआ था। उस समय उनसे दिल्ली में मुलाकात हुई। उस समय मैं कांग्रेस सेवादल में अध्यक्ष था। मेरे हाल पूछे तो उनसे कहा, अंग्रेजों ने मेरे पिता को चाणोद रियासत की जेल में डाला था। वहां आप एकबार सपत्नी पधारें। बाद में वे चाणोद भी आए। यहां उन्हें तत्कालीन राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक गहलोत की प्रेरणा से राजस्थान केनाल का पानी जोधपुर लिफ्ट केनाल को दिए जाने के लिए ज्ञापन दिया था। इस दौरान उनकी पत्नी सोनिया गांधी व क्षेत्रीय विधायक बीना काक भी साथ थी।
-मेवाराम ओड, कांग्रेस कार्यकर्ता
- 20 मई 1991 को सुबह ग्यारह बजे सिरोही के रामझारोखा मैदान में राजीव की सभा थी। उस समय उनका लोकसभा चुनाव के लिए दौरा था। तब उन्हें देखने व सुनने का मौका मिला। एक दिन बाद जैसे ही उनकी मौत का समाचार मिला तो विश्वास ही नहीं हुआ। इसके अलावा तिरुपति में यूथ कांग्रेस का सम्मेलन हुआ था। उसमें मैं, कृपाशंकर त्रिवेदी, सीताराम टांक, कमल जैन सहित सात यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता पाली से गए थे। वहां हम लोग एक धर्मशाला में ठहरे। उस समय राजीवजी धर्मशाला आए और सभी कार्यकर्ता से कुशलक्षेम पूछी। उस दौरान वे हमारे कमरे में भी आए। तभी उन्हें बहुत ही नजदीक से देखने का सौभाग्य मिला।
-मोटू भाई, अध्यक्ष वित्त समिति, नगरपरिषद
-राजीव गांधी के साथ कोई विशेष मुलाकात तो नहीं है। लेकिन एक बार लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए पाली आए। उस दौरान वे प्रधानमंत्री थे। सभा के लिए मैं कार्यकर्ताओं की बस लेकर जोजावर से पाली आया था। पहली बार राजीव को देखा था। चेहरा देखने के बाद अहसास हुआ था अलौकिक शक्ति उसके पीछे है। प्रिंस की तरह लग रहे थे। उनका चेहरा काफी हंसमुख था।
-खुशवीर सिंह, जिला प्रमुख
-1983 में जब वे रणकपुर होते हुए पाली आए थे, तब वे सादड़ी में रुके थे। उस समय में सरकारी सेवा में था। उसी समय कुछ समय के लिए उनके साथ रहने का मौका मिला। वे हंसमुख थे। गरीबों की सेवा करने वाले थे।
-सीडी देवल, अध्यक्ष, जिला कांग्रेस कमेटी
मौत से दो दिन पूर्व मुलाकात
- राजीव की मृत्यु से दो दिन पहले उदयपुर में मुलाकात हुई। इस समय लोकसभा चुनाव का माहौल था। पाली लोकसभा से सी.धर्मीचंद जैन को टिकट दिया गया था। मुलाकात होने पर उन्होंने मुझो बुलाया और कहा कि मैं माधोसिंह दीवान से कहूं कि वे कांग्रेस प्रत्याशी धर्मीचंद की मदद करें। हमने भी राजीवजी से कहा कि वे चुनाव के लिए धर्मीचंद को दिल्ली से आर्थिक मदद कराएं। दो दिन बाद ही उनकी मौत का समाचार से गहरा धक्का लगा। 1988 के बाद पड़े अकाल में वे चाणोद आए। उस समय मैं सभापति था। यहां उन्हें जिले में अकाल की स्थिति से अवगत कराया।
-केवलचंद गुलेछा, सभापति, नगरपरिषद
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