हल्दीघाटी का महाराणा प्रताप संग्रहालय
January 7th, 2007 · 14 टिप्पणीयां · प्रमुख दर्शनीय स्थल, राजसमन्द जिला
हल्दीघाटी पर चेतक स्मारक से कुछ ही कदमों की दुरी पर स्थित है यहां का महाराणा प्रताप संग्रहालय । अभी अभी में ईसका निर्माण हुआ है पर चू्किं यहां सारी सुविधाएं एक ही जगह पर है ईसलिये यह काफी प्रसिद्ध हो गया है । यह बनाया गया है उसी पुराने तरह के शिल्प से । सब कुछ जेसे काफी सहेज कर रखा गया हो ए॓सा प्रतीक होता है । यहां टिकट ले कर अंदर जाने से लेकर के बाहर आने तक सब कुछ काफी व्यवस्थित है। रोजाना यहां काफी पर्यटक आते हैं।
यहां हर पन्द्रह मिनट में आने वालों को Light & Sound शो दिखाया जाता है जिसमें महाराणा प्रताप के जीवन विषयक लघुफिल्म दिखाई जाती हे, साथ ही विभीन्न शस्त्रों, फोटो, किताबों आदि की प्रदर्शनी भी दिखाई जाती हे । ततपश्चात बडे से एक नक्शे पर दिखाया जाता है, कि कहां युद्ध हुआ, राणा प्रताप के घोडे चेतक ने कहां उन्हें सकुशल पहुचाया आदि । आगे महाराणा प्रताप की जीवनी से सबंधित घटनाओं का सजीव ब्योरा दिखाया गया है उनमें पन्ना धाय के बलिदान की कहानी, महाराणा प्रताप का साथीयों के साथ युद्ध की तेयारी हेतु बातचीत, राणा प्रताप की जंगल में रहन सहन, घास की रोटी खाते हुए महाराणा प्रताप और हल्दीघाटी के युद्ध के दोरान एक पावं से घायल चेतक का बलिदान आदि काफी अच्छे ढ़ंग से दिखाया गया है।
हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप का साथ देने वाले भीलू राजा, हकिम खां सुरी, राणा पुंजा, दानी भामाषाह आदि के यहां काफी अच्छे चित्रण है । अन्त में हल्दीघाटी में गुलाब की खेती, गुलाबजल केसे बनता है आदि दिखाया जाता है । बाहर ही हस्तशिल्प, किताबें, चाय नाश्ता, गन्ने का रस, पारंपरिक पोशाको् में फोटोग्राफी, उंट व घोडे की सवारी एवं नौकायन आदि की सुविधाएं है । आज की आधुनिक तकनीकी को पुरातन संस्कृति में मिलाकर जो यह
ताना बाना बनाया गया हे वह काफी आकर्षक लगता है । ए॓सा लगता है जेसे किसी ने उदयपुर के शिल्पग्राम से प्रेरित होकर यह सारा कार्य किया है, पर किसी से प्रेरणा लेना गलत नहीं है। ईतना स्टाफ, ईन सभी का रखरखाव, पर्यटकों को शो दिखाना आदि यह सारा काम ईतने व्यवस्थित तरीके से करना वाकई काबिल ए तारीफ है।
यहां हर पन्द्रह मिनट में आने वालों को Light & Sound शो दिखाया जाता है जिसमें महाराणा प्रताप के जीवन विषयक लघुफिल्म दिखाई जाती हे, साथ ही विभीन्न शस्त्रों, फोटो, किताबों आदि की प्रदर्शनी भी दिखाई जाती हे । ततपश्चात बडे से एक नक्शे पर दिखाया जाता है, कि कहां युद्ध हुआ, राणा प्रताप के घोडे चेतक ने कहां उन्हें सकुशल पहुचाया आदि । आगे महाराणा प्रताप की जीवनी से सबंधित घटनाओं का सजीव ब्योरा दिखाया गया है उनमें पन्ना धाय के बलिदान की कहानी, महाराणा प्रताप का साथीयों के साथ युद्ध की तेयारी हेतु बातचीत, राणा प्रताप की जंगल में रहन सहन, घास की रोटी खाते हुए महाराणा प्रताप और हल्दीघाटी के युद्ध के दोरान एक पावं से घायल चेतक का बलिदान आदि काफी अच्छे ढ़ंग से दिखाया गया है।
हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप का साथ देने वाले भीलू राजा, हकिम खां सुरी, राणा पुंजा, दानी भामाषाह आदि के यहां काफी अच्छे चित्रण है । अन्त में हल्दीघाटी में गुलाब की खेती, गुलाबजल केसे बनता है आदि दिखाया जाता है । बाहर ही हस्तशिल्प, किताबें, चाय नाश्ता, गन्ने का रस, पारंपरिक पोशाको् में फोटोग्राफी, उंट व घोडे की सवारी एवं नौकायन आदि की सुविधाएं है । आज की आधुनिक तकनीकी को पुरातन संस्कृति में मिलाकर जो यह